शाहपुर भूमि घोटाला: ACB की बड़ी कार्रवाई, पूर्व भूमि अधिग्रहण अधिकारी जोगिंदर शर्मा गिरफ्तार, 7 दिन की रिमांड मंजूर
Shahpur Land Scam: Major action by ACB; former Land Acquisition Officer
पंचकूला। Shahpur Land Scam: Major action by ACB; former Land Acquisition Officer, बहुचर्चित शाहपुर प्रतिबंधित भूमि घोटाले में राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसवीएसीबी) ने बड़ा एक्शन लेते हुए भूमि अधिग्रहण अधिकारी (एलएओ) जोगिंदर शर्मा को गिरफ्तार कर लिया। आरोपित को जिला अदालत में पेश करने के बाद सात दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है।
जांच एजेंसी का दावा है कि करोड़ों रुपये के इस खेल में जोगिंदर शर्मा के हिस्से करीब 2.4 करोड़ रुपये आए, जिन्हें उसने दिल्ली, मनाली और भिवानी में अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखा है। एसीबी की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपित का मोबाइल फोन पिछले आठ महीने से बंद था।
जांच एजेंसी के अनुसार यह मोबाइल राजस्थान के सालासर में उसके रिश्तेदारों के पास छिपाया गया है। पुलिस अब मोबाइल बरामद करने के साथ-साथ आरोपी के भिवानी जिले के कुड़ल गांव निवासी रिश्तेदार नवीन और दिनेश की भूमिका की भी जांच कर रही है।
मामला 30 जनवरी 2026 को दर्ज एफआईआर नंबर-03 से जुड़ा है। एसीबी ने एक इंटेलिजेंस रिपोर्ट के आधार पर केस दर्ज किया था। जांच में आरोप है कि तत्कालीन तहसीलदार विक्रम सिंगला को पता था कि 25 अक्टूबर 2019 से संबंधित भूमि की बिक्री पर रोक लगी हुई है। इसके बावजूद कथित मिलीभगत से 16 अक्टूबर 2025 को बिक्री विलेख संख्या-1109 दर्ज कराया गया।
आरोप है कि बलदेव कौर ने गांव शाहपुर, तहसील रायपुररानी स्थित 141 कनाल 8 मरला 7 सरसाई भूमि को एक करोड़ रुपये में भिवानी निवासी नवीन के नाम बेच दिया। विक्रम सिंगला के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-ए के तहत मंजूरी मिलने के बाद एफआईआर दर्ज हुई और बाद में जांच के दौरान तत्कालीन एलएओ जोगिंदर शर्मा को भी आरोपित बनाया गया।
पीजीएफ-पीएसीएल घोटाले से जुड़ी है जमीन
जांच एजेंसी के अनुसार यह जमीन वर्ष 2004 में पीजीएफ लिमिटेड (पर्ल ग्रीन फोरेस्ट) और अन्य लोगों ने खरीदी थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सीबीआई जांच में खुलासा हुआ कि पीजीएफ और पीएसीएल ने निवेशकों से कथित धोखाधड़ी कर बड़ी रकम जुटाई थी।
2014 में सीबीआई ने कंपनी के तत्कालीन एमडी निर्मल सिंह भंगू सहित कई निदेशकों के खिलाफ मामला दर्ज किया और शाहपुर की जमीन से जुड़े दस्तावेज भी जब्त कर लिए थे।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद हुई डील
सीबीआई और बाद में न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा समिति ने हरियाणा सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पीजीएफ और पीएसीएल से जुड़ी किसी भी संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरण बिना एनओसी के नहीं किया जाएगा। वर्ष 2019 में राजस्व रिकॉर्ड में लाल स्याही से विशेष प्रविष्टि कर जमीन की बिक्री पर रोक भी दर्ज कर दी गई थी।
इसके बावजूद वर्ष 2025 में जमीन की रजिस्ट्री होने पर एसीबी ने भ्रष्टाचार, साजिश और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया। अब जोगिंदर शर्मा की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी को उम्मीद है कि इस बहुचर्चित घोटाले से जुड़े कैश, दस्तावेज और अन्य आरोपियों के बारे में अहम खुलासे हो सकते हैं।
बचाव पक्ष ने किया विरोध
जोगिंदर शर्मा की ओर से अधिवक्ता दीपांशु बंसल ने मंगलवार को सक्षम अदालत में एसीबी की रिमांड की मांग का कड़ा विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि गिरफ्तारी संविधान और कानून में दिए गए व्यक्तिगत स्वतंत्रता संबंधी प्रावधानों के विपरीत है, इसलिए पुलिस हिरासत का कोई औचित्य नहीं बनता। बचाव पक्ष ने कहा कि आरोपी ने जांच के दौरान हर स्तर पर सहयोग किया।